भर्तियां फंसीं तो बीत जाएगी आयु सीमा
एक परचलित हिंदी न्यूज पेपर की रिपोर्ट के अनुसार
एक परचलित हिंदी न्यूज पेपर की रिपोर्ट के अनुसार
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| भर्तियां फंसीं तो बीत जाएगी आयु सीमा |
- हर साल तकरीबन 10 से 15 फीसदी अभ्यर्थी हो जाते हैं ओवर एज
- जांच के कारण भर्तियां अटकीं, एक लाख छात्रों को नुकसान की आशंका
इलाहाबाद।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच कराने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसकी वजह से
आने वाले समय में तमाम भर्तियां फंस सकती हैं और ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र ओवर एज होकर परीक्षाओं से वंचित हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को अब इस बात का इंतजार है कि जांच का औपचारिक रूप से आदेश जारी हो और सीबीआई समय से अपना काम शुरू करे, वरना जांच शुरू होने के इंतजार में निर्धारित आयु सीमा बीत जाएगी।- जांच के कारण भर्तियां अटकीं, एक लाख छात्रों को नुकसान की आशंका
इलाहाबाद।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच कराने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इसकी वजह से
प्रदेश सरकार में सत्ता परिवर्तन होते ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से जारी भर्ती प्रक्रिया अचानक रोक दी गई। हालांकि भर्ती प्रक्रिया रुकने के बाद प्रतियोगियों में उम्मीद जगी कि प्रदेश सरकार जल्द ही सीबीआई जांच का निर्णय लेगी, लेकिन सार्वजनकि तौर पर सीबीआई जांच कराए जाने की घोषणा में सरकार को तीन माह बीत गए। इस दौरान हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रिया तकरीबन पूरी तरह से ठप रही। अब सीएम ने सीबीआई जांच कराने की घोषणा की है। इसके बाद प्रतियोगियों को अब औपचारिक रूप से आदेश जारी होने का इंतजार है। मौजूदा भर्ती प्रक्रिया पर रोक के कारण भविष्य में होने वाली भर्तियों पर भी असर पड़ने की पूरी संभावना है। ऐसे में आगे चलकर पीसीएस, लोअर, आरओ-एआओ, पीसीएस-जे, एपीओ जैसी भर्तियां शुरू करने में विलंब होता है तो एक लाख से अधिक प्रतियेागी ओवर एज होकर नौकरी की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
पीसीएस में तकरीबन पांच लाख, लोअर में तीन से साढ़े तीन लाख, पीसीएज-जे में 70 से 80 हजार, एपीओ में 70 से 80 हजार, आरओ-एसआरओ में तीन से साढ़े तीन लाख प्रतियोगी छात्र बैठते हैं। इसके अलावा अन्य भर्ती संस्थाओं की परीक्षा में भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रतियोगियों की अधिकतम आयु की गणना पहली जुलाई से की जाती है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल 10 फीसदी से 15 फीसदी अभ्यर्थी नौकरी के लिए निर्धारित आयु सीमा पूरी कर लेते हैं। ऐसे में सीबीआई जांच के कारण भर्ती प्रक्रिया में देर होती है तो कम से कम एक लाख प्रतियोगी छात्र ओवर एज होकर परीक्षाओं से वंचित हो हो सकते हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि भर्तियों में विलंब होने के कारण प्रतियोगियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार से उनकी दो मांगे हैं। पहली तो सीबीआई जांच समय से शुरू कराई जाए और दूसरी यह कि भर्तियों में देर होती है तो प्रतियोगियों को आवश्यकतानुसार निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में एक से दो वर्ष की छूट प्रदान की जाए।

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