सावन के महीने में सोमवार को शिवजी की पूजा का विशेष विधि विधान है। इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अलग-अलग चीजें अर्पित की जाती हैं।
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| सावन शिव साधना |
सावन के सोमवार के दिन व्रत में शिव एवं माता पार्वती का ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करना चाहिए।
सावन हर सोमवार को श्रीगणेशजी, शिव जी, पार्वती जी और नंदी की पूजा करें और शिवजी की पूजा में
जल, दूध, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र यज्ञोपवि, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्ब पत्र, दूर्वा, आक, धतूरा कमलगट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप, दक्षिणा कपूर से आरती करनी चाहिए। लेकिन ये तो रही भगवान को अर्पित करने की बात लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं ऐसी तीन चीजों के बारे में जिनका सावन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. आइए जानें कौन सी हैं वे चीजें:
जानिए क्या चीजें नहीं खानी चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। दऱअसल ये वात को बढ़ाती हैं। इसके अलावा मानसून के दिनों में इनमें की बैक्टेरिया और कीड़े भी देखे जा सकते हैं। इसलिए सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां खाने की मनाही है।
बैंगन-सावन के महीने में बैंगन नहीं खाया जाता। ऐसा माना जाता है कि बैंगन अशुद्ध है। इसके अलावा कार्तिक में भी बैंगन नहीं खाया जाता। अगर दूसरा पक्ष देखा जाए तो बारिश के दौरान बैंगन में कीड़े ज्यादा लग जाते हैं जो नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बैंगन-सावन के महीने में बैंगन नहीं खाया जाता। ऐसा माना जाता है कि बैंगन अशुद्ध है। इसके अलावा कार्तिक में भी बैंगन नहीं खाया जाता। अगर दूसरा पक्ष देखा जाए तो बारिश के दौरान बैंगन में कीड़े ज्यादा लग जाते हैं जो नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दूध और डेयरी प्रॉडक्ट: सावन के दौरान दूध और डेयरी प्रॉडक्ट जैसे दूध, दही पनीर, कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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